तमिलनाडु के मदुराई में स्थित मीनाक्षी सुन्दरेश्वर मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से आधुनिक विश्व के आश्चर्यों में गिना जाता है.

एक कथा के अनुसार पान्ड्य राजा मलयध्वज की तपस्या से प्रसन्न होकर रानी कंचनशाला ने माँ  पार्वती के अंश मीनाक्षी नामक कन्या को जन्म दिया. कन्या धीरे धीरे बड़ी होने लगी. और जब भगवान शिव उनसे विवाह करने आये तब  मीनाक्षी के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ. स्वयं भगवान विष्णु ने अपनी बहन मीनाक्षी का कन्यादान किया. इस घटना को मंदिर में दिखाया गया है.

मीनाक्षी देवी मंदिर में देवी मीनाक्षी की सांवले रंग की बहुत सुंदर मूर्ति है. जैसी कि दक्षिण भारत में परंपरा है, गर्भगृह में स्थित प्रतिमाओं के दर्शन दीपक के प्रकाश से ही होते हैं. यहां में और भी देवी-देवताओं की भी अनेक मुर्तिया हैं. इस मंदिर के दूसरे कमरो में मीनाक्षी देवी तथा सुंदरेश्वर भगवान के रजत निर्मित वाहन हंस तथा नंदीगण रखे हुए हैं.

निकट ही ‘स्वर्ण पुष्करणी’ नामक अत्यंत सुंदर तालाब है जिसके चारों ओर बने मंडपों में आकर्षक चित्र बने हुए हैं. फरवरी माह में देवी मीनाक्षी तथा भगवान सुंदरेश्वर की प्रतिमाओं को सजाकर यहां नौका विहार कराया जाता है. यहीं शिव-पार्वती विवाह संपन्न हुआ था अत: इस स्थान पर आकर नवविवाहित युगल अपने सुखी दांपत्य जीवन की प्रार्थना करते हैं. 

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