टीन एज में ही क्यों बढ़ रहे हैं आत्महत्या के मामले, जानें इसकी असल वजह

आत्महत्या का कारण है अपने जीवन को खत्म करना। लोग जब किसी पीड़ा में होते हैं तो इस सब से बचने के लिए लोग ऐसा कदम उठा लेते हैं। जो लोग आत्महत्या करते हैं या इसके बारे में सोचते हैं वह लोग परिस्थितियों से भागते हैं उसके सामने घुटने टेक देते हैं। आजकल दुनियाभर में युवाओं में आत्महत्या के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका कारण डिप्रेशन, शराब पीना, हिंसा आदि है। इससब के पीछे का मुख्य कारण इंटरनेट भी है।

आत्महत्या

साइबर बुलिंग है कारण

आजकल लोग नेट की वजह से भी आत्महत्या कर लेते हैं। साइबर बुलिंग इंटरनेट, मैसेज, एप्स, सोशल मीडिया, फोरम्स और गेम्स आदि के सहारे की जाती है। कुछ लोग फर्जी आईडी या एप्लिकेशन बनाकर लोगों को अपने जाल में फंसा लेते हैं। बाद में इन्हीं गेम के चक्कर में आत्महत्या कर लेत हैं। युवा इन मामलों में जल्दी फंसते हैं क्योंकि उनमें विपरीत लिंग के प्रति आकर्षण होता है या कई बार उन्हें सबकुछ जल्दी पा लेने की चाहत होती है। इसलिए यह बहुत ही जरूरी है कि आप अपने बच्चें के साथ – साथ उनके मोबाइल पर भी नजर रखें। यह भी जरूरी है कि आप उनके व्यवहार में आए परिवर्तनों पर भी नजर रखें।

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बच्चों के साथ समय बिताना जरूरी

आजकल बिजी लाइफ के कारण माता –पिता अपने बच्चों के साथ उतना समय नहीं बिता पाते जितना कि आज के बच्चों की जरूरत होती है। बच्चें प्यार और सम्मान की चाहत रखते हैं जब यह उन्हें उनके माता-पिता से नहीं मिलता है तो वह इंटरनेट का सहारा लेते हैं। और बेवजह की चीजें पर ध्यान देना शुरू कर देते हैं। इसलिए यह बेहद की जरूरी है कि माता-पिता अपने बच्चोंकी परवरिश पर पूरा ध्यान दें। उनकी सभी परेशानियों, सुख-दुख में उनका साथ दें, उनकी सभी बातों को अच्छे से सुनें।

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क्यों बढ़ रहे हैं आत्महत्या के मामले

  • आत्महत्या अक्सर निराशा के चलते लोग करते हैं, जिसके लिए बाइपोलर डिस्आर्डर, सीजोफ्रेोनिया, शराब की लत या मादक दवाओं का सेवन जैसे मानसिक विकारों को जिम्मेदार ठहराया जाता है।
  • तनाव के कारक जैसे वित्तीय कठिनाइयां या पारस्परिक संबंधों में परेशानियों की भी अक्सर एक भूमिका होती है। मानसिक रोग और नशीले पदार्थ के दुरुपयोग आमतौर पर आपस में संबंधित दिखते हैं।
  • अन्य जोखिम कारकों में पूर्व में आत्महत्या के किए गए प्रयास, ऐसा करने के लिए साधनों की आसान उपलब्धता, आत्महत्या का पारिवारिक इतिहास या घातक मस्तिष्क चोट भी शामिल हैं।
  • सामाजिक आर्थिक कारक जैसे बेरोजगारी, गरीबी, बेघर होना और भेदभाव किया जाना, आत्महत्या के विचारों को पैदा करता हैं।
  • आत्महत्या के विचार के लिए आनुवांशिकी कारक भी काफी हद तक जिम्मेदार होते है।

 

 

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