सपा-बसपा मेल भाजपा पर भारी, जीत के लिए ध्यान रखनी होगी ये ख़ास बात

नई दिल्ली। केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा ने मंगलवार को स्वीकार किया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों को ताकत दी है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को उन्हें पराजित करने के लिए एक ‘रणनीति’ तैयार करनी होगी।

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मनोज सिन्हा

रेल राज्य मंत्री सिन्हा ने दावा किया कि केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश में रेल, सड़क, जलमार्ग और अन्य माध्यमों के बुनियादी ढांचे के विकास पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें पूर्वांचल क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया गया है।

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उत्तर प्रदेश के उपचुनाव में पार्टी की हार पर चुप्पी साधे रखने वाले सिन्हा ने कहा, “चुनाव में कभी-कभी हम जीतते हैं और कभी-कभी हम हार जाते हैं। हम गोरखपुर और फूलपुर में हार गए, लेकिन अब हम इस हार को अगली बार जीत में बदलने की पूरी कोशिश करेंगे।”

दोनों सीटें सपा ने जीत ली, क्योंकि बसपा ने अखिलेश यादव की अगुवाई वाली पार्टी के उम्मीदवारों को समर्थन दिया था।

सिन्हा ने कहा, “स्वाभाविक रूप से गठबंधन ने सपा और बसपा को ताकत दी है। हमें इस गठबंधन के बावजूद उन्हें हराने की ‘रणनीति’ का खाका तैयार करना होगा।”

उत्तर प्रदेश के रहने वाले सिन्हा 2017 विधानसभा चुनाव में भाजपा की भारी जीत के बाद मुख्यमंत्री पद की दौड़ में सबसे आगे चल रहे नामों में शामिल थे। उन्होंने कहा कि ऐसी ‘विभाजनकारी ताकत’ को केवल विकास के जरिए ही हराया जा सकता है।

सिन्हा ने कहा, “उन्हें हराने का एकमात्र तरीका विकास है। यह जातिवाद से आगे बढ़ रहा है और ऐसी शक्तियों को रोक रहा है..विकास ही एकमात्र तरीका है।”

यह पूछे जाने पर कि 2019 में भाजपा की नौका विकास के सहारे सपा-बसपा गठबंधन को हराने में पार हो जाएगी? सिन्हा ने कहा, “2019 के चुनाव में नरेंद्र मोदी हमारे प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे। सवाल यह है कि विपक्षी मोदीजी के खिलाफ किसे खड़ा करेंगे। हम उनसे पूछेंगे कि आपका चेहरा कौन है।”

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पूर्वी उत्तर प्रदेश में शुरू हुई रेल परियोजनाओं का निरीक्षण करने के बाद वाराणसी से लौटे सिन्हा ने दावा किया कि तीन साल बाद पूरे क्षेत्र का परिवर्तन हो जाएगा।

उन्होंने कहा, “कनेक्टिविटी किसी भी क्षेत्र के विकास का सबसे महत्वपूर्ण पहलू और आवश्यकता है और हमारी सरकार ने इस पर खास ध्यान दिया है।”

मंत्री ने दावा किया कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के एक भी खंड को अनदेखा नहीं किया गया है, जहां रेल लाइनों का दोहरीकरण और विद्युतीकरण नहीं है।

उन्होंने कहा, “इस समय जारी सभी परियोजनाओं को अगले तीन वर्षों में पूरा किया जाएगा। यह देश को विद्युत संचालित दोहरा-रेल खंड प्रदान करेगा।”

उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में कोई भी ऐसा रेलवे स्टेशन नहीं है, जहां सार्वजनिक सुविधाओं से संबंधित काम नहीं चल रहा है।

उन्होंने कहा कि इलाहाबाद-छपरा वाया वाराणसी और गाजीपुर रेल खंड और गंगा नदी पर रेल-सह-सड़क पुल के दोहरीकरण और विद्युतीकरण सहित क्षेत्र की कई परियोजनाएं निर्धारित समय से पहले पूरी हो जाएंगी।

यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार का ध्यान अपने राजनीतिक महत्व के कारण पूर्वांचल पर है? मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार किसी भी क्षेत्र के राजनीतिक महत्व को ध्यान में रखते हुए विकास कार्य शुरू नहीं करती है।

उन्होंने कहा, “विकास हमारी नीति है। अगर विकास पर ध्यान दिया जाता है तो देश आगे बढ़ता है। हम इसके लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं।”

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सिन्हा के अनुसार, “मैं पूर्वांचल क्षेत्र के बारे में बात कर रहा हूं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि देश के दूसरे हिस्सों में विकास कार्य नहीं चल रहे। अन्य क्षेत्रों में भी सरकार परियोजनाओं को लागू करने के लिए कड़ी मेहनत कर रही है।”

मंत्री ने संबंधित मंत्रालयों द्वारा शुरू की गईं विभिन्न सड़क और जलमार्ग परियोजनाओं के बारे में भी बात की।

उन्होंने कहा, “एनएच-29 का काम दिसंबर तक पूरा हो जाएगा। बनारस रिंग रोड और बनारस-बाबतपुर सड़क का निर्माण कार्य पूरे जोरों पर है।”

सिन्हा दूरसंचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) भी हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कहा था कि 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को उच्च गति वाले इंटरनेट के माध्यम से जोड़ा गया है।

उन्होंने यह भी कहा कि गांवों में 5जी कनेक्टिविटी शुरू करने के लिए पायलट आधार पर काम चल रहा है।

सिन्हा ने कहा कि ऐसा प्रयोग उत्तर प्रदेश के महाराजगंज गांव में चल रहा है, जहां लोग इंटरनेट के माध्यम से फिल्में देखते हैं।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में समय लगता है।

उन्होंने कहा, “हम इस बार 5जी की बस को छोड़ने नहीं वाले हैं। 5जी के मामले में हमारी गति वैसी नहीं होगी, जो हमारी 2जी, 3जी और 4जी के दौरान थी।”

सिन्हा ने कहा, “हमारा काम जमीन पर दिख रहा है।”

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