वोडाफोन का हो सकता है आइडिया या जियो में मर्जर

 

देश की दूसरी सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी वोडाफोन इंडिया का मर्जर जियो या फिर आईडिया सेल्युलर में हो सकता है। मुकेश अंबानी द्वारा रिलायंस जियो के लांच के बाद यह पहली बार होगा जब कोई बड़ी टेलिकॉम कंपनी का मर्जर होगा। हालांकि वोडाफोन की भारतीय इकाई ने इसकी पुष्टि नहीं की है, लेकिन लदंन में कंपनी के ग्लोबल मुख्यालय में इस बात की चर्चा काफी तेज हो गई है।

वोडाफोन पिछले दो दशकों से भारत में मौजूद है और एक दशक से नेशनल ऑपरेटर है। वोडाफोन इंडिया में इसकी मूल कंपनी ने सितंबर 2016 में 47700 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जिसका ज्यादातर हिस्सा 81500 करोड़ रुपये के ऋण की अदायगी में गया था। सिंतबर 2016 तक कंपनी के पास 20 करोड़ ग्राहक थे।

इसके बावजूद भी कंपनी को घाटा हो रहा था। इस घाटे के चलते वोडाफोन की भारतीय इकाई के वैल्यूएशन में 500 करोड़ यूरो की कमी की गई थी। वोडाफोन 2010 से आईपीओ लाने की बात कर रही है, लेकिन इसको अभी तक मार्केट में नहीं लाया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, जियो के मालिक मुकेश अंबानी मर्जर में ज्यादा यकीन नहीं रखते हैं, इसलिए हो सकता है कि वोडाफोन आगे चलकर आदित्य बिड़ला समूह के साथ टाई-अप अथवा विलय कर सकती है। बिड़ला समूह आईडिया सेल्युलर की प्रवर्तक कंपनी है। यह भी तब हो सकेगा जब कंपनी को इसके लिए प्रतिस्पर्धा आयोग से अनुमति मिले और वोडाफोन अपनी वैल्यूएशन कराए, क्योंकि अभी यह शेयर बाजार में लिस्टेड नहीं है।

टेलिनॉर, एयरसेल का विलय पाइपलाइन में

फिलहाल भारत में दो मोबाइल कंपनियों का विलय पाइपलाइन में है। टेलिनॉर पहले से ही अपने यूनिनॉर ब्रांड का वोडाफोन में विलय करने पर बात कर रही है, वहीं एयरसेल का अनिल अंबानी की रिलायंस कम्यूनिकेशन में विलय प्रस्तावित है।

हालांकि अभी एयरसेल का सुप्रीम कोर्ट में मामला चल रहा है, जिसकी वजह से अभी इन दोनों का विलय नहीं हो पाया है। अगर यह सारे विलय होते हैं, तो भारत में केवल चार टेलिकॉम कंपनियां रह जायेगी।

 

 

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