पानी की शुद्धता जांच करने के लिए बनी लैब की टपक रही छत

रिपोर्ट- पुष्कर नेगी

चमोली। कहते हैं कि पानी अगर साफ हो तो जीवन भी स्वच्छ रहता है। मगर पानी ही सुरक्षित न हो तो फिर पानी की अशुद्धता से विभिन्न प्रकार की बीमारी इंसान को हो सकती है। जी हां हम बात कर रहे चमोली जिले की जहां पर लाखों के खर्चे से लैब तो उपलब्ध करा दिया गया मगर उसके लिए भवन की व्यवस्था नहीं कर पाए।

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चमोली जिले के दशोली विकास खंड की बात करें तो यहाँ पर हर जगह से पानी टेस्टिंग करने के लिए लैब में लाया जाता है मगर लैब की स्थिति बहुत ही बदहाल है। दीवार से बरसात का पानी टपक रहा है तो कही से पूरी छत ही खोखली हो गयी है,ऐसे में पानी की गुणवत्ता कैसे सही से जांची जाय। ये सोचने वाल विषय है। विभागीय कर्मचारियों से बात करने पर पता चला कि उन्होंने ने कई बार इस कि शिकायत उच्च स्तर व जलसंस्थान से की है मगर कोई भी इस और ध्यान देने को तैयार नही है।

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वर्ष 2012 में लैब का संचालन चमोली में किया गया था, भवन की दीक़त शुरू से ही बनी थी मगर हालात इतने बदहाल है कि 6 साल पूरे होने पर भी लैब के लिए एक भवन तक की व्यवस्था नहीं हो पाई।दशोली के सभी ग्रामीणों का पानी की यहाँ पर जांच की जाती है मगर सुविधा उपलब्ध तो की गई लेकिन उसके लिए भवन नहीं बन पाया । कर्मचारियों ने बताया कि 20 पैरामीटर पानी की जांच यहाँ पर की जाती है और काफी महंगे उपकरण यहाँ उपलब्ध है जो इस हालात में है कि कभी भी खराब हो सकते है। और विभाग के कर्मचारी अपना कार्य भी सही से नहीं कर पा रहे हैं।

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