नोटबन्दी में सहकारी बैंकों की साजिश से काला धन हुआ सफ़ेद

आयकर विभाग का दावा है कि सहकारी बैंकों ने नोटबंदी को कालेधन को सफेद करने के मौके के रूप में इस्तेमाल किया. आयकर विभाग ने देशभर में सहकारी बैंकों के इस तरह के कामकाज के तरीके पर गंभीर चिंता जताई है

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को 500 और 1,000 का नोट बंद करने की घोषणा की थी. यह नोटबन्दी 30 दिसंबर तक जारी रही.इस दौरान हुए वित्तीय व्यवहार पर आयकर विभाग ने एक विश्लेषण रिपोर्ट तैयार की जिसमें अधिकारियों ने पाया कि 8 नवंबर के बाद ये बैंक कालेधन के सृजन और उसे ठिकाने लगाने में अभूतपूर्व स्तर पर लगे हुए थे.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में कई तरीकों से सांठगांठ देखने को मिली. इन बैंकों ने बड़ी मात्रा में धनराशि को काले से सफेद करने के लिए चालाक तथा गैरकानूनी रास्ता अपनाया. आयकर जांच में राजस्थान के अलवर के मामले की मिसाल दी जिसमें अलवर में बैंक के निदेशकों ने 90 संदिग्ध पहचान वाले 90 लोगों के नाम पर लोन हासिल कर 8 करोड़ रुपये का चूना लगाया. वहीं प्रबंधन ने दो करोड़ रुपये के व्यक्तिगत बेहिसाबी धन को सफेद करने के लिए इसका उपयोग किया.

जयपुर के एक सहकारी बैंक में डेढ़ करोड़ रुपये बैंक के क्लियरिंग हाउस कमरे की अलमारी में पाए गए.इसी तरह विभाग ने कई शहरों में बिना आवंटन वाले तथा बेनामी लॉकरों से भारी मात्रा में नकदी बरामद की. इनमें सोलापुर, पंढरपुर (महाराष्ट्र), सूरत (गुजरात) और राजस्थान के जयपुर के बैंक शामिल हैं.

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