नोटबंदी की वजह से जनता और उद्योग दोनों परेशान

नोटबंदी पर सार्वजनिक किया गया यह अभी तक का पहला व बड़ा सर्वे है। इसमें 50 अर्थशास्त्रियों, 700 कारोबारी घरानों और 2000 लोगों को शामिल किया गया है। पीएचडी चैंबर की तरफ से दी गई सूचना के मुताबिक 81 फीसद अर्थविदों ने कहा है कि लंबी अवधि में नोटबंदी से फायदा होगा लेकिन कुछ वर्षो तक देश की आर्थिक विकास दर पर इसका बहुत ही नकारात्मक असर पड़ेगा। 73 फीसद उद्योगों ने कहा है कि वे नकदी की बेहद गंभीर संकट से गुजर रहे हैं। इस वजह से वे अपने मजदूरों और ठेकेदारों को भुगतान नहीं कर पा रहे हैं। सर्वे के मुताबिक सिर्फ असंगठित क्षेत्र के उद्योगों पर ही नहीं बल्कि संगठित क्षेत्र के उद्योगों पर भी इसकी मार पड़ी है।

जहां तक आम जनता के रुख की बात है तो 92 फीसद लोगों ने कहा है कि उन्हें रोजमर्रा की चीजों को खरीदने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा है। जबकि 76 फीसद ने आवागमन, 68 फीसद ने स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में परेशानी का सामना किया है। 89 फीसद लोगों ने कहा है कि बैंकों व एटीएम से नकदी निकालने में उन्हें सबसे यादा समस्या का सामना करना पड़ा है। वैसे सर्वे में यह बात भी सामने आई है कि लोग पैसा खर्चने को लेकर अब यादा समझदार हो गये हैं।

डेबिट व क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल बढ़ गया है और जो पैसा है उसे बचाकर रखने की प्रवृत्ति बढ़ी है। लेकिन यह स्थिति मध्यम वर्ग व संपन्न वर्ग की है। सबसे यादा परेशानी गरीब वर्ग के लोगों की है। उनके लिए स्मार्ट फोन की कमी और साक्षरता का अभाव सबसे बड़ी समस्या है। सरकार को इससे निपटने के लिए पीएचडी चैंबर की तरफ से कई सुझाव दिए गए हैं जिसमें गरीबी रेखा के नीचे रहने वालों को सब्सिडी पर स्मार्ट फोन देने की बात भी है।

 

 

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