जाने क्यों पिलाया जाता है नागों को दूध

सांपों को दूध पीलाने से सर्प देवता प्रसन्न होते हैं. जिसके कारण आपके ऊपर उनकी कृपा बनी रहती है. आपके घर से कभी लक्ष्मी बाहर नहीं जाती है. इसलिए यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि के नागों को दूध लावा अर्पित किया जाए. जिससे आप पर कृपा बनी रहे.इस बारें में कई कथाए प्रचलित है. इसी कारन यह कहना संभव नहीं है कि आखिर सच्चाई क्या है. कुछ तो ऐसी कथाए है कि जिनका रहस्य जानकर आप चौक जाएगे.

जानिए इन कथाओं के बारें में.

प्रचीन काल में दशराज्ञयुद्ध के राजाओं में से एक राजा यदु ने नागकन्याओं से विवाह किया था. इन नागरानियों से उन्हें चार पुत्र हुए. और इन्होंने ही आर्यावर्त के दक्षिण में चार राज्यों की नींव रखी. ये चार राज्य महिष्मती, सहयाद्रि, वनवासी और रत्नपुर थे.महिषमति के नागों ने भैंस के दूध के प्रति रुचि को नाग को दूध पिलाने की परंपरा शुरू हुई. रत्नपुर कीमती रत्नों के लिए जाना जाता था जिससे नागों को नागमणि से जोड़ा गया. सहयाद्रि में चंदन के वृक्ष थे, अनेक सांप उनसे लिपटे रहते थे. इसलिए चंदन के वृक्ष से सांप के लिपटने के मिथक को तैयार किया गया.

वनवासियों ने सर्वप्रथम नाग वंश के नागों को चित्रित करके पूजना शुरू किया था. महिष्मति के सर्व वायुभक्षी थे. और इनके अधिपति थे कार्कोटक नाग कहलाए.

पर्यावरणविद इस पंरपरा को पारिस्थितिक संतुलन से जोड़कर देखते हैं. उनका कहना है कि सांप ऐसा प्राणी है जिसे पानी के भीतर सांस लेने में मुश्किल आती है. बारिश में जैसे ही बिल में पानी घुसता है, वे बिलों से बाहर निकल आते हैं. बड़ी संख्या में सांप निकलने पर लोग उन्हें मार देंगे, इसीलिए ऋषियों ने उन्हें दूध-लावा चढ़ाने की परंपरा शुरू की ताकि सांपों का जीवन और पारिस्थितिक संतुलन बना रहे.

 

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