गैर-फसली कर्ज पर भी मिले ब्याज सब्सिडी: सीएसीपी

तकनीकी उन्नयन पर किसानों के निवेश को बढ़ावा देने के लिए गैर-फसली कर्ज को भी ब्याज सब्सिडी के दायरे में लाया जाए। कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (सीएसीपी) ने केंद्र सरकार से यह सिफारिश की है। सीएसीपी के चेयरमैन विजय पाल शर्मा ने उद्योग संगठन भारत चैंबर ऑफ कॉमर्स के एक कार्यक्रम में यह जानकारी दी। इसके पीछे दलील यह दी गई है कि गैर-फसली कर्ज पर ब्याज सब्सिडी मिलने पर किसान खेती के लिए तकनीकी और उपकरणों पर निवेश करने के लिए प्रेरित होंगे।

शर्मा ने कहा कि किसानों को फसली कर्ज पर ब्याज सब्सिडी का लाभ मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नीति आयोग की हालिया बैठक में सीएसीपी की ओर से सुझाव दिया गया है कि अब इस ब्याज सब्सिडी स्कीम का विस्तार करके गैर-फसली कर्ज को भी इसमें शामिल किया जाए। कृषि क्षेत्र के तहत मिलने वाले दोनों तरह के कर्जो में अंतर करने की कोई जरूरत नहीं है। इसलिए उनकी ओर से वित्त मंत्रलय से भी आगामी बजट में इस सिफारिश को शामिल करने का अनुरोध किया गया है।

केंद्र सरकार फसली कर्ज को समय पर चुकाने वाले किसानों को तीन फीसद ब्याज सब्सिडी देती है। कुल कृषि ऋणों में फसलों के लिए दिए जाने वाले लोन की 85 फीसदी हिस्सेदारी है। चालू वित्त वर्ष के दौरान कुल कृषि ऋण का आंकड़ा नौ लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार कृषि के लिए टिकाऊ विकास का लक्ष्य लेकर चल रही है। अच्छे मानसून के चलते मौजूदा वित्त वर्ष 2016-17 में कृषि क्षेत्र की विकास दर चार फीसद से थोड़ा ऊपर रहने का अनुमान है।

शर्मा के मुताबिक केंद्र चाहता है कि राय सरकारें कृषि उपजों के भंडारण व वितरण में भी शामिल हों। न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर सरकारी खरीद का विकेंद्रीकरण करते हुए रायों को पहले ही इसमें शामिल किया जा चुका है। पश्चिम बंगाल भी उन रायों में से है जो विकेंद्रित प्रणाली के तहत धान की खरीद करता है। इस प्रणाली के चलते रायों को यादा से यादा किसानों को शामिल करने में मदद मिलेगी।

 

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