उद्योगपति थापर-नंदा समेत 16 आरोपियों को HC से भी राहत नहीं

नैनीताल हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर 2016 को कोटद्वार क्षेत्र में वन कानूनों के उल्लंघन के आरोपी उद्योगपति समीर थापर, राजीव खन्ना सहित 16 लोगों की जमानत प्रार्थना पत्र पर त्वरित सुनवाई और दस दिन के नोटिस निर्धारित समय में छूट प्रदान करने के लिए दायर प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया है। 
 
बुधवार को न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। नई दिल्ली निवासी राजीव खन्ना, जयंत नंदा ने हाईकोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दायर कर त्वरित सुनवाई की मांग की थी। इस पर अपर महाधिवक्ता डीके शर्मा ने आपत्ति दर्ज करते हुए कहा कि नियम के अनुसार दस दिन का नोटिस दिया जाना अनिवार्य होता है। इस जमानत प्रार्थना पत्र पर नोटिस के दस दिन के बाद ही सुनवाई की जा सकती है।

प्रभारी निरीक्षक उत्तम सिंह जिमियाल कोतवाल कोटद्वार पौड़ी ने एक जनवरी 2017 को एफआईआर दर्ज कर राजीव खन्ना, रोहित सिंह सागर, जयंत नंदा, राज कमल, समीर थापर सहित 16 लोगों को गिरफ्तार किया था।

इन पर आरक्षित वन में अनाधिकृत रूप से वन अधिनियम का उल्लंघन करने और मोहिंदर सिंह से 83 शराब की बोतलें बरामद करने का आरोप था। इस प्रकरण पर निचली अदालत ने छह जनवरी 2017 को उनकी जमानत प्रार्थना पत्र को खारिज कर दिया था।

निचली अदालत से जमानत प्रार्थना पत्र खारिज होने के बाद हाईकोर्ट में दस दिन का नोटिस होता है। दस दिन के बाद जमानत प्रार्थना पत्र सुनवाई के लिए कोर्ट में आ सकता है।

याचिकाकर्ताओं की ओर से जमानत प्रार्थना पत्र पर त्वरित सुनवाई और दस दिन के नोटिस निर्धारित समय में छूट प्रदान करने के प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने जमानत पत्र पर त्वरित सुनवाई करने की अर्जी खारिज कर दी।

 
 
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