आंगनवाड़ी केंद्रों के पीछे का सच जानना जरूरी है

रिपोर्ट- विनीत त्यागी

रुड़की। राज्य सरकार और शिक्षा विभाग को सुधारने के लाख दावे करते हों लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। आपको बता दें कि रुड़की ब्लॉक में डेढ़ सौ से अधिक आंगनबाड़ी केंद्र है लेकिन 80 से 90 फीसदी आँगनबाड़ी केंद्र किराए के भवनों पर चल रहे है। साथ ही बच्चों की संख्या में लगातर गिरावट आ रही है ऐसे में कई आंगनबाड़ी केंद्र सिर्फ शोपीस बनकर रह गए है।

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शहर के एक मौहल्ले में 8 आंगनबाड़ी केंद्र है लेकिन इनमें से सिर्फ एक सेंटर में ही बच्चे है वो भी मात्र 3 जोकि सेंटर तक भी नही पहुँच पाते है और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियां समय बिताकर चले जाती है। जहाँ सरकार कम छात्रों वाले स्कूलों को बंद कर रही है क्या ये आंगनबाड़ी केंद भी बंद होंगे या नही यह तो समय बताएगा।

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वहीं ज्वांइट मजिस्ट्रेट रुड़की नितिका खंडेलवाल का कहना है कि जमीन ना होने के चलते ये समस्या आ रही है और किराए के भवनो मे चल रहे आँगनबाड़ी केंद्रो की समस्या को जल्द ही दूर करने के प्रयास किए जाएंगे।

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