अमेरिका नहीं चीन है भारत का बड़ा हितैषी: ग्लोबल टाइम्स

नई दिल्ली
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ रही नजदीकी चीन को रास नहीं आ रही है। चीन के सरकारी अखबार ने यह जताने की कोशिश की है कि भारत का हितैषी अमेरिका नहीं बल्कि चीन है जो कई तरह से उसका सहयोग कर सकता है। चीन ने नसीहत देते हुए कहा कि तेजी से आगे बढ़ते चीन को रोकने की अमेरिका की कोशिशों में भारत को भागीदार नहीं बनना चाहिए। ग्लोबल टाइम्स ने संपादकीय में लिखा है कि भारत को अमेरिका के जाल में फंसने के बजाए अपने विकास के रास्तों के लिए चीन की तरफ रुख करना चाहिए।

अमेरिका और भारत के बीच होनेवाली 2+2 वार्ता के रद्द होने के संदर्भ में संपादकीय में कहा गया, ‘अमेरिका भारत के प्रति अपनी तरफ से काफी निष्ठा दिखा रहा है लेकिन क्या इस निष्ठा की भारतीयों को सबसे ज्यादा जरूरत है या फिर इसकी कोई कीमत है जो निर्धारित नहीं है।’

आपको बता दें कि चीन ने भारत को यह सलाह ऐसे समय में दी है जब हाल ही में अमेरिका ने भारत के साथ 2+2 वार्ता को टाल दिया था। अमेरिका और भारत के रक्षा और विदेश मंत्रियों के बीच यह वार्ता 6 जुलाई से वॉशिंगटन में होनेवाली थी। माना जा रहा है कि अमेरिका और भारत के बीच खटास बढ़ रही है। भारत को अमेरिका की ओर से दोहरे प्रतिबंधों का डर है। पहला अगर वह रूस के साथ S-400 मिसाइल सिस्टम समझौता करता है तो, और दूसरा अगर भारत ईरान से तेल आयात करना बंद नहीं करता है तो। ऐसे समय में चीन ने भारत से करीबी बढ़ाने की चाल चली है।

ग्लोबल टाइम्स को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी का मुखपत्र कहा जाता है। अखबार ने साफ कहा है कि अमेरिका की इंडो-पसिफिक स्ट्रैटिजी से हासिल करने से कहीं ज्यादा भारत का नुकसान होनेवाला है। संपादकीय में कहा गया, ‘अमेरिका की रणनीति का एक ही उद्देश्य है कि चीन के उभार के मुकाबले भारत बड़ी भूमिका निभाए। अमेरिका जैसा चाहता है क्या भारत सचुमुच में वैसी भूमिका चाहता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि इस रणनीति में चीन के एक मजबूत मिलिटरी ऐंगल भी शामिल है।’

लेख में आगाह किया गया कि अमेरिका की रणनीति भारत के घरेलू विकास में मददगार नहीं बल्कि बाधा पैदा करनेवाली है। इसमें कहा गया कि भारत चीन से अपने पैरों पर खड़े होना सीख सकता है और इससे एशिया ही नहीं पूरी दुनिया में उसका स्थान तय होगा। आर्टिकल में कहा गया कि भारत विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है और उसकी सबसे प्रमुख चुनौती यह है कि वह कैसे ग्लोबल प्रोडक्शन चेन में शामिल होने के लिए मैन्युफैक्चरिंग और इन्फ्रास्ट्रक्चर की नींव खड़ी करता है।

ग्लोबल टाइम्स ने कहा है कि अगर भारत अमेरिकी रणनीति पर आगे बढ़ता है तो वह चीन ही नहीं कई पड़ोसी देशों से सहयोग की भविष्य की संभावनाओं को खो देगा।
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