अमेरिका को अपने पादरी को तुर्की से रिहा कराने का विश्वास  

वाशिंगटन। अमेरिकी अधिकारियों को लगता है कि वे तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यप एर्दोगन के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने के आरोप में जेल भेजे गए अमेरिकी पादरी एंड्रयू ब्रनसन को रिहा कराने की उनकी कोशिश सफल होने वाली है। एक विश्वस्त सूत्र ने गुरुवार को सीएनएन को बताया कि अमेरिकी अधिकारी अपने तुर्की समकक्षों से किए उस समझौते के खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं जो ब्रनसन के शुक्रवार को तुर्की की अदालत में पेश होने से पटरी पर है।

अमेरिकी पादरी एंड्रयू ब्रनसन

अदालत अगर ब्रनसन पर से नजरबंदी हटाने का आदेश देती है और उनके यात्रा करने पर प्रतिबंध नहीं लगाती है तो वे देश छोड़ने के लिए आजाद हो जाएंगे। दोषी पाए जाने पर उन्हें 35 साल तक की कैद की सजा सुनाई जा सकती है।

अमेरिका के उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने हालांकि गुरुवार को ब्रनसन के रिहा होने की उम्मीद जताई।

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उन्होंने कहा, “मैं यह सुनिश्चित करने वाला कोई नहीं हूं, मैं सिर्फ यह कह सकता हूं कि राष्ट्रपति ने स्पष्ट कर दिया है, हमारी सरकार ने बिल्कुल स्पष्ट कर दिया है कि जब तक पादरी एंड्रयू ब्रनसन रिहा नहीं होते और अपने परिवार समेत अमेरिका स्थित अपने घर नहीं लौटते, हम अपनी बात पर अड़े रहेंगे।”

गुरुवार को ही विदेश विभाग प्रवक्ता हीदर नॉर्ट ने कहा, “मुझे ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं है, हमें कुछ नहीं पता। कल (शुक्रवार को) एक सुनवाई होने वाली है। यह कानूनी प्रक्रिया है।”

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रनसन 2016 से जेल में हैं और इसके बाद तुर्की और अमेरिका के रिश्तों में खटास पैदा हो गई है।

ट्रंप ने अगस्त में कहा था कि तुर्की ने दोस्त वाला काम नहीं किया है और उन्होंने पादरी पर जासूसी करने के अभियोग लगाए हैं जबकि वह जासूस नहीं हैं।

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